कर्बला के शहीदो के पार्थिव शरीरों की दफ़न की याद में 13 मुहर्रमुल हराम के अवसर पर बनी असद क़बीले की महिलाओं ने बैनुल-हरमैन में अज़ादारी और शोक सभाएँ आयोजित करके उस वफ़ादारी की परंपरा को दोबारा जीवित किया, जो वाक़ए कर्बला के बाद शहीदों के शवों की दफ़न से जुड़ी एक अविस्मरणीय ऐतिहासिक घटना बन चुकी है।

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